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  • माँ!

    क्या लिखूँ तुम्हें!

    बस शामों-सहर पाया है तुम्हें

    अपने ही करीब

    कुछ मुसकुराती सी।

    एक ऊर्जा सी भर जाती हो तुम।

    भीगी पलकों से सोचती हूँ तुम्हें।

    मन के एक कोने में हर पल तुम हो!

    घर का वो कोना

    आज भी याद है मुझे।

    आज भी सालती है

    वो बिछुड़ने की बेला!

    आज भी खड़ी हूँ मैं

    कहीं ना कहीं उसी दहलीज़ पर।

    तुम्हें आज भी सोचती हूँ मैं

    हर पल!

    हे प्रभु!

    सदा सलामत रहे मेरी माँ!

    वो माँ

    जो याद आती है शामों-सहर!

     

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    प्रतिमा शुक्ल 

  • Naa Hai Aarzoo Koi Aaj, Naa Bacha Koi Ittefaq Hai...
    Jeevan Ke Sare Lakshaya, Aaj Maati Mein Khaaqk Hai...
    Jhulas Raha Hai Afsana Mera, Darshako Ki Taank Jhaank Hai...
    Adhoori Chahaton Ko Alvida, Ke Bhavishya Mera Rakh Hai...

  • zindagi bhar chalte rahna hai
    kahin rukna nahi bas chalte jana hai
    sapano ko sach kar dena hai
    manjil ko pakar hi rahna hai
    khud ko bhi sapano me khojte rhna hai
    kahin rukna nahi bas chalte jana hai !
    har kisi ki muskan ko badhana hai
    sabhi ke kam pe ana hai
    khushiyon ko bat te jana hai
    har dard ko mitana hai
    kahin rukna nahi bas chalte jana hai !
    krodh ko bas me karna hai
    jeewan safal banana hai
    kuch karke dekhana hai
    kahin rukna nahi bas chalte jana hai.

     

  • “I am proud of you my Child…” is a statement that we as parents use very rarely. When we use this statement, something really big has happened. Either the child has scored a perfect 10 or he/she has really made it big in some interschool/interstate or international competition. And one important aspect that I would want to bring out in the statement itself is “I am”.
    As a parent when I appreciate my child by saying I am proud, the immediate thought that comes to my mind is that the accomplishment my child has made is mine despite the fact that he or she is the one who has put in all the effort. What am I as a parent trying to do here? Appreciating the child for:
    • the effort that they have put in or
    • letting him or her fulfill my wish and thus in turn making me proud
    In most cases it is the latter. If that was not the case, the statement should have been “You should be proud of yourself my child…”
    However, I would still like to use the statement “ I am proud….” , when my child:
    - Helps somebody cross the road
    - Shows respect towards one and all
    - Is sensitive towards the needy and helps them have access to basic amenities
    - Makes a difference to one’s life on a regular basis
    This will really make me feel proud as this is going to be a real testimony of the value system that we as a parent have imbibed in our child. In this completive world, it is imperative to feel proud of small little things that our children do to bring a smile on others face.

     

  • Bachho ko kyu mara tumne ?
    Kya bigada tha Masumone ?
    Jo khel the the maidanome,
    Bhej diya une tabutome.
    School se Beta aayega ,
    Bhook bhook chillayega,
    Soch ke Ma ne pahle se hi,
    Tayyaree kar ke rakkhi thi.
    Par khabar mili jab usko aisi ,
    Bhagi-doudi school pahochi,
    Har taraf bhikhare Lasho me,
    Ma Bachha apna dhund rahi thi .
    Bachho ko kyu mara tumne ?
    Kya bigada tha Masumone?
    Bap apne kandho pe Beto ke janaje utha rahe
    Ma lipat ke roti Bachhe se,Na le jane ki jid pe hai.
    Dahal gaya duniyaka dil dekh ke aise ye halat ,
    Tujko mujhko dekh kaha ye le aya hia atankvad. Bachho ko kyu mara tumne ?
    Kya bigada tha Masumone ?
    Jo khel the the maidanome, Bhej diya une tabutome.

    Written by Nishant Jambhulkar

     

  • Man ki awaj hai, jindgi
    khwabo khayalose sajati hai, jindgi
    majbut irado se banaty hai, jindgi
    pyar ka ehsas hai,jindgi
    jise samajh sake to uphar hai,jindgi
    verna bakbas hai, jindgi
    majbut irado ki ladai hai, jindgi
    verna plane kadai hai jindgi

    shailendra srivastava

     

  • aaj desh me kitne hi berojgar navyuvak ghum rahe he. jinke paas degree hote hue bhi nokri nahi mil rahi he. esa keval aarkshan ki wajah se ho raha he, aarkshan ke kaaran anpad logo ko nokri mil rahe he jo kam pade likhe he,
    or jo degree dhari he wo ese hi ghum rahe he.
    unhe nokri nahi mil pane ki wajah se wo log galat line chun lete he, jiski wajah se unki zindgi kharab ho jati he, wo log galat dhandha ya desh drohi ban jate he jisse unka bhavishya kharab ho jata he.
    sarkar ko chahiye ki kewal pade likhe logo ko nokri dena chahiye, aarkshan ko khatm kar dena chahiye..
    taki logo ka jeevan safal ho sake, unhe unke padanusar nokri mil sake.

     

  • खलक खुदा का, मुलुक बाश्शा का
    हुकुम शहर कोतवाल का
    हर खासो-आम को आगह किया जाता है
    कि खबरदार रहें
    और अपने-अपने किवाड़ों को अन्दर से
    कुंडी चढा़कर बन्द कर लें
    गिरा लें खिड़कियों के परदे
    और बच्चों को बाहर सड़क पर न भेजें
    क्योंकि
    एक बहत्तर बरस का बूढ़ा आदमी अपनी काँपती कमजोर आवाज में
    सड़कों पर सच बोलता हुआ निकल पड़ा है

    शहर का हर बशर वाकिफ है
    कि पच्चीस साल से मुजिर है यह
    कि हालात को हालात की तरह बयान किया जाए
    कि चोर को चोर और हत्यारे को हत्यारा कहा जाए
    कि मार खाते भले आदमी को
    और असमत लुटती औरत को
    और भूख से पेट दबाये ढाँचे को
    और जीप के नीचे कुचलते बच्चे को
    बचाने की बेअदबी की जाये

    जीप अगर बाश्शा की है तो
    उसे बच्चे के पेट पर से गुजरने का हक क्यों नहीं ?
    आखिर सड़क भी तो बाश्शा ने बनवायी है !
    बुड्ढे के पीछे दौड़ पड़ने वाले
    अहसान फरामोशों ! क्या तुम भूल गये कि बाश्शा ने
    एक खूबसूरत माहौल दिया है जहाँ
    भूख से ही सही, दिन में तुम्हें तारे नजर आते हैं
    और फुटपाथों पर फरिश्तों के पंख रात भर
    तुम पर छाँह किये रहते हैं
    और हूरें हर लैम्पपोस्ट के नीचे खड़ी
    मोटर वालों की ओर लपकती हैं
    कि जन्नत तारी हो गयी है जमीं पर;
    तुम्हें इस बुड्ढे के पीछे दौड़कर
    भला और क्या हासिल होने वाला है ?

    आखिर क्या दुश्मनी है तुम्हारी उन लोगों से
    जो भलेमानुसों की तरह अपनी कुरसी पर चुपचाप
    बैठे-बैठे मुल्क की भलाई के लिए
    रात-रात जागते हैं;
    और गाँव की नाली की मरम्मत के लिए
    मास्को, न्यूयार्क, टोकियो, लन्दन की खाक
    छानते फकीरों की तरह भटकते रहते हैं…
    तोड़ दिये जाएँगे पैर
    और फोड़ दी जाएँगी आँखें
    अगर तुमने अपने पाँव चल कर
    महल-सरा की चहारदीवारी फलाँग कर
    अन्दर झाँकने की कोशिश की

    क्या तुमने नहीं देखी वह लाठी
    जिससे हमारे एक कद्दावर जवान ने इस निहत्थे
    काँपते बुड्ढे को ढेर कर दिया ?
    वह लाठी हमने समय मंजूषा के साथ
    गहराइयों में गाड़ दी है
    कि आने वाली नस्लें उसे देखें और
    हमारी जवाँमर्दी की दाद दें

    अब पूछो कहाँ है वह सच जो
    इस बुड्ढे ने सड़कों पर बकना शुरू किया था ?
    हमने अपने रेडियो के स्वर ऊँचे करा दिये हैं
    और कहा है कि जोर-जोर से फिल्मी गीत बजायें
    ताकि थिरकती धुनों की दिलकश बलन्दी में
    इस बुड्ढे की बकवास दब जाए

    नासमझ बच्चों ने पटक दिये पोथियाँ और बस्ते
    फेंक दी है खड़िया और स्लेट
    इस नामाकूल जादूगर के पीछे चूहों की तरह
    फदर-फदर भागते चले आ रहे हैं
    और जिसका बच्चा परसों मारा गया
    वह औरत आँचल परचम की तरह लहराती हुई
    सड़क पर निकल आयी है।

    ख़बरदार यह सारा मुल्क तुम्हारा है
    पर जहाँ हो वहीं रहो
    यह बगावत नहीं बर्दाश्त की जाएगी कि
    तुम फासले तय करो और
    मंजिल तक पहुँचो

    इस बार रेलों के चक्के हम खुद जाम कर देंगे
    नावें मँझधार में रोक दी जाएँगी
    बैलगाड़ियाँ सड़क-किनारे नीमतले खड़ी कर दी जाएँगी
    ट्रकों को नुक्कड़ से लौटा दिया जाएगा
    सब अपनी-अपनी जगह ठप
    क्योंकि याद रखो कि मुल्क को आगे बढ़ना है
    और उसके लिए जरूरी है कि जो जहाँ है
    वहीं ठप कर दिया जाए

    बेताब मत हो
    तुम्हें जलसा-जुलूस, हल्ला-गूल्ला, भीड़-भड़क्के का शौक है
    बाश्शा को हमदर्दी है अपनी रियाया से
    तुम्हारे इस शौक को पूरा करने के लिए
    बाश्शा के खास हुक्म से
    उसका अपना दरबार जुलूस की शक्ल में निकलेगा
    दर्शन करो !
    वही रेलगाड़ियाँ तुम्हें मुफ्त लाद कर लाएँगी
    बैलगाड़ी वालों को दोहरी बख्शीश मिलेगी
    ट्रकों को झण्डियों से सजाया जाएगा
    नुक्कड़ नुक्कड़ पर प्याऊ बैठाया जाएगा
    और जो पानी माँगेगा उसे इत्र-बसा शर्बत पेश किया जाएगा
    लाखों की तादाद में शामिल हो उस जुलूस में
    और सड़क पर पैर घिसते हुए चलो
    ताकि वह खून जो इस बुड्ढे की वजह से
    बहा, वह पुँछ जाए

    बाश्शा सलामत को खूनखराबा पसन्द नहीं

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    धर्मवीर भारती

     

  • A lot of people are facing problem regarding windows 8 metro style apps like bing, news, weather etc. not being able to connect internet. I also faced this problem and searched internet for nearly 2 months with no luck. Windows 8 is a relatively new OS and all the solution Microsoft suggests for this problem is to refresh the PC. But if you have a lot of valuable programs installed, you would probably not want to do that. Same was the case with me.

    Today, while playing with the settings, I found the reason of this problem and was surprised how simple the solution was. The problem actually is with a setting with internet sharing, which makes metro style internet explorer act in a very restrictive manner. All you have to do is turn off sharing. Following are the steps to do this:

    1) Go to the charms menu.
    2) click on the settings option.
    3) Click on the "Internet access" option.
    4) Right click on the active connection.
    5) Click on "Turn sharing on or off".
    6) Click on "No, don't turn on sharing or connect to devices".

    That's all. Your apps will be able to connect to internet now.

    Regards
    Satya Prakash Shukla

  • I was in a bus, when it passed a hill.

    Beauty of nature, had come to a still.

    It was high and beautiful,

    As beautiful as I had never seen,

    nor I think I will.

    At that moment, a man jumped from the hill.

    He laid down motionless and still.

    And the hill was still high and beautiful.